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विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना

मेरे गुरुवर सुधासागर,, यह बात सिर्फ में ही नही कहता बल्कि दुनिया का हर वो शख्स कहता हैं जिसकी आस्था जैन धर्म से जुड़ी हुई हैं और लोगों की इस बात से मुझे कभी जलन नही हुई बल्कि गर्व होता हैं कि में ऐसे गुरु का चेला हूं जिसे सारी दुनिया अपना गुरु बनाना चाहती हैं
गुरुदेव का मंगल विहार आरम्भ हुआ ही था कि लोगो की अपार भीड़ ने उन के पीछे पीछे चलना शुरू कर दिया था क्योंकि ये वही लोग हैं जो उन्हें अपना गुरु अपना आदर्श मानते हैं और उनकी एक झलक पाने व उनके बताए पदचिन्हों पर चलने को लालायित रहते हैं
फेसबुक, व्हाट्सएप व अन्य सोशल मीडिया साइडों पर प्रसारित होने वाले वीडियो को देखकर कुछ लोग प्रश्न करते हैं कि पूज्य सुधासागर जी महाराज के पीछे जो भीड़ चलती हैं वह उनकी चमत्कारिक छाप की वजह से चलती हैं वरना देश मे और भी बहुत सारे संत हैं तो में उन सभी लोगो से कहना चाहता हूं कि में लगभग 30 वर्षों से पूज्य मुनि सुधासागर जी महाराज के चरणों का सेवक बन कर रहा हूं और मेरे इतने दिनों के दरम्यान उन्होंने एक भी तंत्र मंत्र नही दिया बल्कि वे तो सदा तीर्थंकर प्रभु की प्रतिमाओं का शांतिधारा अभिषेक करने की प्रेरणा देते हैं और अपने जीविकोपार्जन से अर्जित धन को किसी अच्छे कार्य मे लगाने की प्रेरणा देते हैं जैसे मन्दिर निर्माण , मूर्ति स्थापन आदि आदि
चांदखेड़ी से चलकर कुंडलपुर क्षेत्र तक पहुचने में लगने वाले अल्प समय मे भी पूज्यवर का जहां जहां प्रवास हुआ वहां वहां एक नए तीर्थ की सरंचना की नींव रखी गयी शिलान्यास हुआ,, मेरे गुरुवर से जब भी कोई प्रश्न करता हैं कि आप इतने तीर्थ क्यों बनाते हैं तो उनका उत्तर मुझे आनंदित करता हैं वे कहते हैं कि मेरे गुरु चाहते थे कि वे मुझे तीर्थ बना दे तो में उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरु बस इसी प्रयास में में नए नए तीर्थो की परिकल्पना करता रहता हूं,,
आपको बता दे कि युवावस्था में युवक जयकुमार के रूप में जब आचार्य विद्यासागर जी महाराज के पास जाकर शिखर जी क्षेत्र पर जाने और शकुशल यात्रा पूरी होने का आशीर्वाद लेने पहुँचे थे तब आचार्य प्रवर ने कहा था वहां क्यों जाना में तुम्हे खुद तीर्थ बना देता हूँ और शायद गुरुदेव के मुख से निकलने वाले वे अनमोल शब्द मंत्र बनकर आज अपनी सिद्धि की प्रसिद्धि का लेख लिख रहें हैं
गुरुदेव कहते हैं मेरे गुरु मेरे तीर्थ हैं और में उनकी वंदना करने जा रहा हूं ऐसे ही आज दुनिया का हर छोटा बड़ा भक्त भी यही कहता हैं कि मेरे गुरु मेरे तीर्थ हैं और में उनकी वंदना करना चाहता हूं ,, मेरे साथ तो स्थिति ऐसी हैं कि में जब भी जाता हूं तो उनमें ही खो जाता हूं सुधामय हो जाता हूं बस उन्हें देखकर ही खुश होता जाता हूं बस होता जाता हूं बस होता जाता हूं
पूज्य गुरुदेव के चरणों मे सत सत नमन
श्रीश ललितपुर
९४१५५०७९६०
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