● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●

● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●

● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●

Day 07 : : द्रव्यसंग्रह गाथा 07
ग्रंथकार- आचार्य नेमिचन्द्र सिद्धान्तिदेव
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर

वण्ण रस पंच गंधा
दो फासा अट्ठ णिच्छया जीवे।
णो संति अमुत्ति तदो
ववहारा मुत्ति बंधादो।।7।।

Video के द्वारा अर्थ समझने के लिए click करें
➡️

Full playlist द्रव्यसंग्रह | आचार्य नेमिचन्द्र सिद्धान्तिदेव | गाथा 01-58 | शुद्ध पाठ | शब्दार्थ | व्याकरणिक विश्लेषण | व्याख्या

नए सदस्यों के लिए : स्वाध्याय group को join करने के लिए m. 9314591397 पर डॉ. पुलक गोयल से सम्पर्क कीजिए।

★Share in all ur Jain groups★

Comments (0)

Your email address will not be published. Required fields are marked *