● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●

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Day 05 : : द्रव्यसंग्रह गाथा 05
ग्रंथकार- आचार्य नेमिचन्द्र सिद्धान्तिदेव
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर

णाणं अट्ठ-वियप्पं
मदि-सुदि-ओही अणाण-णाणाणि।
मणपज्जय-केवलमवि
पच्चक्ख-परोक्ख-भेयं च।।5।।

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Full playlist द्रव्यसंग्रह | आचार्य नेमिचन्द्र सिद्धान्तिदेव | गाथा 01-58 | शुद्ध पाठ | शब्दार्थ | व्याकरणिक विश्लेषण | व्याख्या

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