● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●
● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय● Day 28 : : तत्त्वसार गाथा 54 – 55ग्रंथकार- आचार्य देवसेन स्वामीप्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर सुह-दुक्खं पि सहंतोणाणी झाणम्मि होइ दिढ-चित्तो।हेऊ कम्मस्स तओणिज्जरणट्ठं इमो भणिओ।।54।। ण मुएइ सगं भावंण परं परिणमइ मुणइ अप्पाणं।जो जीवो संवरणंणिज्जरणं सो फुडं भणिओ।।55।। Video के द्वारा अर्थ समझने के लिए click करें➡️ तत्त्वसार | […]
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