● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●
Video 04 : : गोम्म्टेश स्तुति : : छंद 07 – 08
स्तुतिकार- आचार्य नेमिचन्द्र सिद्धांत चक्रवर्ती
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर
आसां ण जो पोक्खदि सच्छदिट्ठी,
सोक्खे ण वंछा हय-दोस-मूलं।
विराय-भावं भरहे विसल्लं,
तं गोम्मटेसं पणमामि णिच्चं।।7।।
उपाहि-मुत्तं धण-धाम-वज्जियं,
सुसम्म-जुत्तं मय-मोह-हारयं।
वस्सेय-पज्जंतमुववास-जुत्तं,
तं गोम्मटेसं पणमामि णिच्चं।।8।।
भगवान गोम्म्टेश्वर बाहुबली की विश्व प्रसिद्ध स्तुति का पहली बार एक एक शब्द से अर्थ को समझने के लिए click कीजिए…
➡️
★ कृपया सभी जैन श्रावकों को share अवश्य कीजिए ★
