● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●
Day 38 : : तत्त्वसार : अंतिम गाथा 74
ग्रंथकार- आचार्य देवसेन स्वामी
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर
सोऊण तच्चसारं
रइयं मुणिणाह-देवसेणेण।
जो सद्दिट्ठी भावइ
सो पावइ सासयं सोक्खं।।74।।
Video के द्वारा अर्थ समझने के लिए click करें
➡️
तत्त्वसार | आचार्य देवसेन स्वामी | द्रव्यानुयोग | गाथा 01-74 | शुद्ध पाठ | शब्दार्थ | व्याकरणिक विश्लेषण | व्याख्या | डॉ. पुलक गोयल : https://www.youtube.com/playlist?list=PLb6OtA3xYjEMlxRECwcg1rrSXHjC5L_lg
★Share in all ur Jain groups★
