● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●

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Day 35 : : तत्त्वसार गाथा 68 – 69
ग्रंथकार- आचार्य देवसेन स्वामी
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर

गमणागमण-विहीणो
फंदण-चलणेहि विरहिओ सिद्धो।
अव्वाबाह-सुहत्थो
परमट्ठ-गुणेहिं संजुत्तो।।68।।

लोयालोयं सव्वं
जाणइ पेच्छइ करण-कम-रहियं।
मुत्तामुत्ते दव्वे
अणंत-पज्जाय-गुण-कलिए।।69।।

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तत्त्वसार | आचार्य देवसेन स्वामी | द्रव्यानुयोग | गाथा 01-74 | शुद्ध पाठ | शब्दार्थ | व्याकरणिक विश्लेषण | व्याख्या | डॉ. पुलक गोयल : https://www.youtube.com/playlist?list=PLb6OtA3xYjEMlxRECwcg1rrSXHjC5L_lg

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