● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●
Day 27 : : तत्त्वसार गाथा 52 – 53
ग्रंथकार- आचार्य देवसेन स्वामी
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर
भुंजंतो कम्म-फलं
भावं मोहेण कुणइ सुहमसुहं।
जइ तो पुणो वि बंधइ
णाणावरणादि-अट्ठ-विहं।।52।।
परमाणु-मित्त-रायं
जाम ण छंडेइ जोइ स-मणम्मि।
सो कम्मेण ण मुच्चइ
परमट्ठ-वियाणओ समणो।।53।।
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➡️ https://youtu.be/eW5Kig6zHBE
तत्त्वसार | आचार्य देवसेन स्वामी | द्रव्यानुयोग | गाथा 01-74 | शुद्ध पाठ | शब्दार्थ | व्याकरणिक विश्लेषण | व्याख्या | डॉ. पुलक गोयल : https://www.youtube.com/playlist?list=PLb6OtA3xYjEMlxRECwcg1rrSXHjC5L_lg
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