
बुंदेलखंड के हजारों वर्ष प्राचीन जैन तीर्थ क्षेत्र बंधाजी में १७० मंडलीय समवशरण महामंडल विधान विश्व शांति महायज्ञ एवं आध्यात्मिक संस्कार शिविर का आयोजन किया जा रहा है । बंधाजी में आध्यात्मिक संस्कार शिविर में शामिल होने बुंदेलखंड सहित मध्य प्रदेश , उत्तर प्रदेश के अनेक नगरों से शिवरार्थी धर्म साधना में लीन है । शिविरार्थी पूरे दिन भर धार्मिक वातावरण में रहते हैं । उनकी दैनिक क्रियाएं प्रातः ४.०० बजे से शुरू हो जाती हैं जो रात्रि १०.०० बजे तक चलती हैं । ५.०० बजे मुनिश्री द्वारा सभी शिविरार्थियों को ध्यान कराया जाता है ।
उल्लेखनीय है कि दश लक्षण पर्व का आज छठवां दिन उत्तम संयम धर्म का दिन है । ८.३०बजे भौयरे में मुनिश्री विमल सागर महाराज के मुखारविंद से शांतिधारा एवं ९.०० बजे मुनिश्री के प्रवचन हुए । दोपहर १.०० बजे से समवशरण महामंडल विधान प्रारंभ हुआ । मुनिश्री विमल सागर महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि आज पर्युषण पर्व का छठवां दिन उत्तम संयम का दिवस है । मुनिश्री ने कहा कि जो व्यक्ति संयमी होता है , वह अपने कर्मों की निर्जरा करता है , जो संयम को धारण नहीं करता वह जीवन भर कर्मों को बांधता रहता है । मुनिश्री ने कहा कि संयम का ही परिणाम है कि साधारण व्यक्ति मुनि । महाराज बन जाता है । संयम के बिना 5 व्यक्ति अधूरा है , जब तक व्यक्ति । के जीवन में संयम नहीं होगा , वह व्यक्ति मोक्षगामी नहीं बन सकता । अपने जीवन में जितना हो सके । संयम को धारण करो निश्चित ही | आत्मा का कल्याण होगा । मुनिश्री ने । कहा आज आप लोगों को यहां से । संकल्पित होकर जाना है कि अपने न जीवन में सप्त व्यसन का सेवन नहीं 5 करेंगे । संयम के साथ अपने जीवन ने को धार्मिक कार्यों में लगाएंगे ।
