पन्ना। आज पर्वराज पयूषण का पांचवां दिन उत्तम सत्य धर्म के रूप में श्री 1008 चिंतामणी पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर धाम पन्ना में 105 क्षु . आराधनाश्री माता जी व क्षु . श्री 105 साधनाश्री माता जी के ससंघ सानिध्य में बड़ी धूमधाम से मनाया गया । माताजी ने अपनी देशना में श्रावकों को उत्तम सत्य धर्म का संबोधन देते हुए कहा कि जो सत्य है वह ही धर्म है , यह अनेक दोषों का निवारण करने वाला है । इस भव तथा परभव में सुख का करने वाला है , सभी के विश्वास करने का कारण है । जबकि असत्यवादी हमेशा निंदा करने योग्य होता है । सभी की अप्रीति का कारण होता है हमेशा ही दण्ड पाता है व परभव में तिर्यंचगति में वचन रहित , केन्द्रिय विकलत्रय आदि में असंख्यात भव धारण करता है । मनुष्य अनेक कारणों से असत्य बोलता है , उसमें झूठ बोलने का सबसे प्रधान कारण है लोभ । लोभ में आकर मनुष्य अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिये असत्य बोलता है । असत्य बोलने का दूसरा कारण भय है । मनुष्य को जब अपने उपर कोई आपत्ति आती हुई दिखाई देती है अथवा अपनी कोई हानि होती हुई दिखती है तो वह डरकर असत्य बोल देता है । झूठ बोलकर वह उस हानि या विपत्ति से बचने का प्रयत्न करता है जबकि ऐसा होता नहीं । झूठ से तत्कालीन थोड़ा – थोड़ा फायदा तो कमाया जा सकता है , परन्तु बड़ी बडी हानि भी होती है । थोडी सी विपत्ति के लिये बोला गया थोड़ा सा झूठ व्यक्ति को विपत्तियों के सागर में ही धकेल देता है ।
हमें जीवन में कभी भी असत्य का सहारा नहीं लेना चाहिये । बड़ी से बड़ी विपत्तियों में भी सत्य के साथ ही रहना चाहिए । इससे बड़ी से बड़ी विपत्ति भी ही समय में समाप्त हो जायेंगी । रात्रि कालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम में तत्वार्थ सूत्र अध्याय 3 की प्रतियोगिता हुई , जिसमें सिंद्धान्त जैन , कुछ कृ . तानी जैन , सुमित जैन विजेता हुये और पुरुस्कार प्राप्त किया । साथ ही अष्ट द्रव्य सजाओ प्रतियोगिता में प्रथम स्थान कु . लाडो जैन द्वितीय स्थान कु . आन्या जैन व तृतीय स्थान आद्या जैन ने प्राप्त किया ।
