#शेयर
#विद्याधर_से_विद्यासागर (किताब)
#प्रथम_आहार
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आज आहार के लिए एक नहीं दो मुनि निकले हैं नसियां जी से। आगे हैं मुनिवर ज्ञानसागरजी पीछे हैं विद्यासागरजी अन्य दिनों की तुलना में आज चौके ज्यादा लगे हैं। घरों के समक्ष जनसमुदाय भी अधिक है।सभी के चेहरे पर कौतूहल है- देखें, युवा मुनि विद्यासागर की विधि कहाँ बनती हैI
पहले चौका में ही महाराज विद्यासागर की विधि बन जाती है। भाग्य सोनी जी का चमका-चमका लगता है। लोग उन्हें धन्य धन्य कर रहे हैं, वे सपरिवार विनयपूर्वक, विधिपूर्वक युवा योगी को आहार दान दे रहे हैं। लोग उनके भाग्य को सराह रहे हैं। श्रेष्ठ हुए सोनी जी जो शुरू दिन ही सुनहला समय पा गए।
नगर वि-नगर के फोटोग्राफरों पर एक अलग रंग चढ़ गया था जिसके कारण कई दिनों तक मासूम नवीन योगी मुनि विद्यासागर को कैमरे वाले मच्छरों के चमकीले डंक सहने पड़े। वे कैमरे से निकलती शिखा से छेदते रहे और अरुण मुनि विद्यासागर समता भाव से देखते सहते बचते रहे।पोस्ट-98…शेषआगे…!!!
