विद्याधर से विद्यासागर

*☀विद्यागुरू समाचार☀* विद्याधर से विद्यासागर

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मुनि_दीक्षा : दीक्षा समारोह प्रारम्भ होता है। ब्र विद्याधर खड़े होकर गुरुवर की वंदना करते हैं, हाथ जोड़कर दीक्षा प्रदान कर देने की प्रार्थना करते हैं।

गुरुवर का आदेश पाकर विद्याधर वैराग्यमयी, सारगर्भित वचनों से जनता को उद्बोधन देते हैं, तदुपरांत विद्याधर ने हवा में उड़ने वाले केशों का लुंचन करना प्रारम्भ कर दिया। अपनी मुष्ठिका में सिर से इतने सारे बाल खींच ले जाते हैं कि देखने वाले आह भर पड़ते हैं। फिर दूसरी मुष्ठिका। तीसरी सिर के बाल निकालते हुए कुछ स्थानों से रक्त झिर आया है।

विद्याधर के चेहरे पर आनंद खेल रहा है। हाथ आ गए दाढ़ी पर दाढ़ी की खिंचाई और अधिक कष्टकारी होती है। वे दाढ़ी के बाल भी उसी नैर्मम्य से खींचते हैं। हाथ चलता जाता है, बाल निकलते जाते हैं, पूरा चेहरा लहूलुहान हो गया है। श्रावक सफेद वस्त्र ले उनकी तरफ दौड़ पड़ते हैं।

वे अपने चेहरे को छूने नहीं देते। बाल खींचते जाते हैं। रक्त बहता जा रहा है। विद्याधर जहाँ के तहाँ/ अविचलित खुश हैं। आनन्दमय हैं। लोग शुद्ध भस्म (राख) लगाने प्रवृत्त हैं।

पोस्ट-95…शेषआगे…!!!

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