● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●

।।स्वाध्याय परमं तपः।। ● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●

● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●

Day 21 : : तत्त्वसार गाथा 40 – 41
ग्रंथकार- आचार्य देवसेन स्वामी
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर

रायद्दोसादीहि य
डहुलिज्जइ णेव जस्स मण-सलिलं।
सो णिय-तच्चं पिच्छइ
ण हु पिच्छइ तस्स विवरीओ।।40।।

सर-सलिले थिरभूए
दीसइ णिरु णिवडियं पि जह रयणं।
मण-सलिले थिरभूए
दीसइ अप्पा तहा विमले।।41।।

Video के द्वारा अर्थ समझने के लिए click करें
➡️

तत्त्वसार | आचार्य देवसेन स्वामी | द्रव्यानुयोग | गाथा 01-74 | शुद्ध पाठ | शब्दार्थ | व्याकरणिक विश्लेषण | व्याख्या | डॉ. पुलक गोयल :

★Share in all ur Jain groups★

Comments (0)

Your email address will not be published. Required fields are marked *