● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●

● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय● स्वाध्याय

● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●

Day 20 : : तत्त्वसार गाथा 38 – 39
ग्रंथकार- आचार्य देवसेन स्वामी
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर

जम्मण-मरण-विमुक्का
अप्प-पएसेहिं सव्व-सामण्णा।
सगुणेहिं सव्व-सरिसा
णाणमया णिच्छयणएण।।38।।

इय एवं जो बुज्झइ
वत्थु-सहावं णएहिं दोहिं पि।
तस्स मणो डहुलिज्जइ
ण राय-दोसेहिं मोहेहिं।।39।।

Video के द्वारा अर्थ समझने के लिए click करें
➡️

तत्त्वसार | आचार्य देवसेन स्वामी | द्रव्यानुयोग | गाथा 01-74 | शुद्ध पाठ | शब्दार्थ | व्याकरणिक विश्लेषण | व्याख्या | डॉ. पुलक गोयल :

★Share in all ur Jain groups★

Comments (0)

Your email address will not be published. Required fields are marked *