● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●

।।स्वाध्याय परमं तपः।। ● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●

● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●

Day 19 : : तत्त्वसार गाथा 36 – 37
ग्रंथकार- आचार्य देवसेन स्वामी
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर

चेयण-रहिओ दीसइ
ण य दीसइ इत्थ चेयणा-सहिओ।
तम्हा मज्झत्थो हं
रूसेमि य कस्स तूसेमि।।36।।

अप्प-समाणा दिट्ठा
जीवा सव्वे वि तिहुयणत्था वि।
सो मज्झत्थो जोई
ण य रूसइ णेय तूसेइ।।37।।

Video के द्वारा अर्थ समझने के लिए click करें
➡️

तत्त्वसार | आचार्य देवसेन स्वामी | द्रव्यानुयोग | गाथा 01-74 | शुद्ध पाठ | शब्दार्थ | व्याकरणिक विश्लेषण | व्याख्या | डॉ. पुलक गोयल :

★Share in all ur Jain groups★

Comments (0)

Your email address will not be published. Required fields are marked *