शेयर 🤗 #विद्याधरसेविद्यासागर (किताब)😍
शांत बने रहे गुरुजी। उनसे पुनः अनुरोध दोहराया गया श्रेष्ठियों द्वारा, तो बोले- मैंने सब सोच-समझ लिया है। विद्याधर को समीप से परख लिया है। वह इस कार्य में न केवल सफल होगे, बल्कि मुनिपद की गौरव गरिमा बढ़ाएँगे। आप लोग निश्चिन्त रहे।
-मगर अभी चार वर्ष रुक जाएं महाराज जी तो ठीक होगा।
- क्यों?
-अभी उम्र कम है।
- मुनि पद के लिए आपके ग्रन्थ में क्या उम्र प्रस्तावित है ? कहाँ लिखी है अर्हताएँ? बतला सकते हैं सेठ जी ? -जी यह तो नहीं मालूम पर हमारा मन कहता है कि इतनी छोटी उम्र में न दी जाए दीक्षा।
-मन के कहने पर आप चल रहे हैं, यही है आपकी गलती। आप जो देख रहे हैं और जो यथार्थ है, उसके कहने पर कब चलेंगे ?
- महाराज जी यह प्रस्ताव हम दस-पाँच लोगों का नहीं है, सारा समाज ऐसा कहता है।
- सेठ जी समाज की नहीं, हम आगम की बातों पर चलते हैं। हमारा निश्चय दृढ़ है।
अतः छोड़िए इस विषय को, नहीं महाराज, आप नाराज न हों। हम लोग चाहते हैं कि पहले आप उन्हें वर्णी या क्षुल्लक न बनाएँ, तो सीधा ऐलक बना दीजिए, परन्तु अभी मुनि न बनाइए।
पोस्ट-87…शेषआगे…!!!
