● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●
Day 15 : : तत्त्वसार गाथा 28 – 29
ग्रंथकार- आचार्य देवसेन स्वामी
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर
सिद्धो हं सुद्धो हं
अणंत-णाणाइ-समिद्धो हं।
देह-पमाणो णिच्चो
असंखदेसो अमुत्तो य।।28।।
थक्के मण-संकप्पे
रुद्धे अक्खाण विसय-वावारे।
पयडइ बंभ-सरूवं
अप्पा झाणेण जोईणं।।29।।
Video के द्वारा अर्थ समझने के लिए click करें
➡️
तत्त्वसार | आचार्य देवसेन स्वामी | द्रव्यानुयोग | गाथा 01-74 | शुद्ध पाठ | शब्दार्थ | व्याकरणिक विश्लेषण | व्याख्या | डॉ. पुलक गोयल : https://www.youtube.com/playlist?list=PLb6OtA3xYjEMlxRECwcg1rrSXHjC5L_lg
★Share in all ur Jain groups★
