● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●
Day 13 : : तत्त्वसार गाथा 24 – 25
ग्रंथकार- आचार्य देवसेन स्वामी
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर
जह कुणइ को वि भेयं
पाणिय-दुद्धाण तक्क-जोएणं।
णाणी वि तहा भेयं
करेइ वर-झाण-जोएणं।।24।।
झाणेण कुणउ भेयं
पुग्गल-जीवाण तह य कम्माणं।
घेत्तव्वो णिय-अप्पा
सिद्ध-सरूवो परो बंभो।।25।।
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तत्त्वसार | आचार्य देवसेन स्वामी | द्रव्यानुयोग | गाथा 01-74 | शुद्ध पाठ | शब्दार्थ | व्याकरणिक विश्लेषण | व्याख्या | डॉ. पुलक गोयल : https://www.youtube.com/playlist?list=PLb6OtA3xYjEMlxRECwcg1rrSXHjC5L_lg
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