● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●

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Day 12 : : तत्त्वसार गाथा 22 – 23
ग्रंथकार- आचार्य देवसेन स्वामी
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर

अत्थित्ति पुणो भणिया
णएण ववहारिएण ए सव्वे।
णोकम्म-कम्मणादी
पज्जाया विविह-भेय-गया।।22।।

संबंधो एदेसिं
णायव्वो खीर-णीर-णाएण।
एकत्तो मिलियाणं
णिय-णिय-सब्भाव-जुत्ताणं।।23।।

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