विद्याधर से विद्यासागर

*☀विद्यागुरू समाचार☀* विद्याधर से विद्यासागर

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स्नान / दर्शन पूजन / भोजन सम्पन्न हुआ अजमेर की धरती पर विद्याधर का, फिर गुरुवर के दर्शन करने चल पड़े मदनगंज किशनगढ़ की ओर। प्रथम दर्शन यहीं हुए पूज्य मुनिवर ज्ञानसागरजी के, वह भी श्री कजोड़ीमल के साथ विद्याधर के मानस में गुरु से पूर्व कजौड़ीमल जुड़ गये। एक गुरु, दूसरा गुरुभक्त मिल गये गुरुनाथ।

कजौड़ीमलजी ने ज्ञानसागरजी से वह सब बतलाया जो विद्याधर चाहते थे। नजर भरकर देखा ज्ञानसागरजी ने विद्याधर की ओर। पूछ बैठे-

  • क्या नाम है तुम्हारा ?
  • जी, विद्याधर ।
  • हूँ…… तुम विद्याधर हो। मुस्काए…..फिर बोले तो विद्या सीख कर उड़ जाओगे विद्याधरों की तरह फिर मैं श्रम क्यों करूँ ?

नहीं महाराज, नहीं, मैं उड़ने नहीं आया, मैं रमने आया हूँ। ज्ञानसागरजी की चरणरज में रमने विश्वास करें मैं ज्ञानार्जन कर भागूँगा नहीं। कुछ पल रुककर फिर बोले विद्याधर मुनिवर से, यदि आपको मेरी बातों पर विश्वास नहीं है तो मैं शपथ लेता हूँ, आज से ही आजीवन सवारी का त्याग करता हूँ।

पोस्ट-68…शेषआगे…!!!

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