● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●
Day 10 : : तत्त्वसार गाथा 18 – 19
ग्रंथकार- आचार्य देवसेन स्वामी
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर
रागादिया विभावा
बहिरंतर-उहय-वियप्पं मोत्तूणं।
एयग्ग-मणो झायउ
णिरंजणं णियय-अप्पाणं।।18।।
जस्स ण कोहो माणो
माया लोहो य सल्ल-लेस्साओ।
जाइ-जरा-मरणं चिय
णिरंजणो सो अहं भणिओ।।19।।
Video के द्वारा अर्थ समझने के लिए click करें
➡️
स्वाध्याय group को join करने के लिए m. 9314591397 पर डॉ. पुलक गोयल पर whatsapp कीजिए।
★Share in all ur Jain groups★
