● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●
Day 08 : : तत्त्वसार गाथा 14 – 15
ग्रंथकार- आचार्य देवसेन स्वामी
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर
संका-कंखा-गहिया
विसय-पसत्ता सुमग्ग-पब्भट्ठा।
एवं भणंति केई
ण हु कालो होइ झाणस्स।।14।।
अज्ज वि तिरयणवंता
अप्पा झाऊण जंति सुर-लोए।
तत्थ चुया मणुयत्ते
उप्पज्जिय लहहि णिव्वाणं।।15।।
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