।।स्वाध्याय परमं तपः।।
सुविधिसागर जी महाराज ने पद्मपुराण में मूल संघ आम्नाय के सिद्धांतों के विपरीत जो बातें लिखी हैं उस पर एक प्रकरण में यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि पद्मपुराण के पर्व १७ श्लोक २६८ में जो गन्धर्व देव द्वारा मद्यपान करने का वर्णन आया है उसमें वर्णित गन्धर्व देव नहीं था अपितु एक विद्याधर […]
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