प्रवचनांश

Muni Shri 108 Pramansagar Ji प्रवचनांश

🤗आज लोग मानवता से कोसों दूर हो चुके है🤗
😊#प्रवचनांश- मुनिश्री #प्रमाणसागर😍 जी महाराज।
बाबा भारती के पास एक सुल्तान नाम का घोड़ा था जिससे वह बहुत प्यार करते थे। एक डाकू खड़क सिंह उसको हड़पना चाहता था। एक दिन बाबा अपने घोड़े पर सवार होकर जा रहे थे तब अचानक रस्ते में लेटे हुए एक अपाहिज व्यक्ति के कराहने की आवाज सुनाई दी। बाबा ने अपने घोड़े को रोककर उसकी मदद करने की सोची। उसने कहा- मेरी दशा के कारण मुझे चलने में दिक्कत हो रही है मुझे अमुक गांव तक जाना है।

‘बाबा भारती ने कहा, “मैं तुम्हे छोड़ देता हूँ।” बाबा ने उसको घोड़े पर बिठाया और स्वयं पैदल चलने लगे। थोड़ी ही देर हुई की बाबा के हाथ में झटका सा लगा और लगाम उनके हाथ से छूटकर सवार के हाथ में आ गई। बाबा ने देखा की सवार घोड़ा लेकर भाग रहा है। बाबा यह दृश्य देखकर एकदम भौचक्का रह गए। “अरे भाई! मेरा घोड़ा कहाँ ले जा रहे हो?” सवार की आवाज आई, “बाबा! मैं कोई अपाहिज नहीं डाकू खड़क सिंह हूँ और यह घोड़ा अब मेरा हो गया तुम्हे नहीं मिलेगा।”

बाबा भारती एक पल के लिए स्तब्ध रह गए लेकिन अगले ही पल अपने आप को संभालते हुए कहा, “खड़क सिंह! तुम्हें घोड़ा ले जाना है तो ले जाओ लेकिन इस घटना का जिक्र तुम किसी से मत करना अन्यथा लोगों का जरुरतमंदों से विश्वास उठ जाएगा।” इतना कहकर बाबा उल्टे पांव भारी मन से लौट आए। इधर खड़क सिंह के कानों में यह वाक्य गूंजते रहे थे “लोगों का जरुरतमंदों से विश्वास उठ जाएगा”। उसे रातभर नींद नहीं आई। आधी रात में घोडे को बाबा भारती की कुटिया के बाहर बांध कर चला गया।

बाबा के एक वाक्य ने उसका हृदय परिवर्तित कर दिया। किसी को बदलना है तो प्यार से बदला जा सकता है नफरत से तो केवल नफरत पैदा होती है।

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