प्रवचनांश

Muni Shri 108 Pramansagar Ji 🏳‍🌈शंका समाधान🏳‍🌈

😍हम सब भगवान बनने चले है, पहले इंसान तो बन जाये…!!

प्रवचनांश🤗- मुनिश्री #प्रमाणसागर जी महाराज।

एक किसान गाँव से शहर की ओर आया। उसके साथ पाँच साल का बच्चा था। उसे प्यास लग रही थी, गरमी का समय था। शहर में जैसे ही प्रवेश किया उसे एक बड़ी सी दुकान दिखी। बेटा बहुत देर से पानी के लिए मचल रहा था। पानी का कोई प्रबंध नहीं था वो सेठजी की दुकान में चला गया। और सेठजी से कहा- ‘सेठजी! मेरे साथ पाँच साल का बच्चा है, पानी पीना चाहता है, कृपा कर पानी पिला दीजिए । सेठ अख़बार पढ़ रहा था, बोला – बैठो! आदमी को आने दो ।

अब बच्चा तो बच्चा था। क़रीब दस मिनट बीत गए। बच्चे ने कहा, “ओ! दादा पानी।” किसान ने दोबारा सेठजी से कहा सेठ जी! पानी पिला दीजिए न । सेठ ने तुनक कर कहा, “कह दिया न, आदमी आने दो।” किसान ने विनम्रता से हाथ जोड़े और कहा, “सेठजी! थोड़ी देर के लिए आप ही आदमी बन जाइए।”

उस आदमी को हम आदमी कैसे कहें जो प्यासे को पानी न पिलासके। वो आदमी, आदमी कैसे कहलाये जो किसी के आँसू न पोंछ सके। जब, जहाँ, जैसी जरूरत हो उस अनुरूप मदद करने के लिए तैयार रहो।

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