-: संतों के उद्गार :-

🔅अमृतमयी वाणी🔅

-: संतों के उद्गार :-

आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज (छाणी) एक प्रभावक साधु थे| वह अध्यात्म प्रिय एवं आत्म हितैषी थे, अतः उनका अधिक प्रचार-प्रसार नहीं हो पाया| इन्होंने अपने जीवन में आत्महित को प्रधानता दी तथा बाह्य क्रियाकांडों से दूर रहकर आचार्य श्री कुन्दकुन्द की आम्नाय का संरक्षण व परिवर्धन किया| इनके उपदेशों से प्रभावित होकर अनेक लोगों ने अंधविश्वासों व मूढ़ताओं को छोड़कर अवश्य ही आत्महित का अवलम्बन किया| ये महान तपस्वी थे तथा इन्होंने आत्महित रूप साध्य की सिद्धि की|

  • मुनि श्री 108 सुधा सागर जी महाराज

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