देशनोदय चवलेश्वर
*निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव टेम्पल डे प्रवर्तक108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन मे कहा
गुरु का विचार नहीं आचार देखा जाता है,पंडित का आचार नहीं विचार देखा जाता है
1.औरतें पर्दा क्यों-बड़ों से औरतें पर्दा क्यों करती थी बड़ा शक्तिमान है इसकी नियत बदल गई,खराब हो जाएगी वो बर्बाद कर देगा,बड़ों की आंख से नियत खराब हो गई छोटे का सर्वनाश हो जायेगा,भाभी देवर से कभी घुंघट नहीं डालती जेठ से घुंघट डालती है छोटा असमर्थ होता है उससे डर नहीं होता लड़की कभी भी अपने भाई को पिता जन्म देने वाले किसी से नहीं करती क्योंकि उनसे डर नही रहता है।
2.ज्ञानी की विनय-ज्ञानी कि विनय करो यदि ज्ञान अच्छा है उसमें चरित्र मत देखना है जिसके पास ज्ञान रूपी सोना है ज्ञान ले लो हिणगुण ज्ञानी से भी ज्ञान ले लो, समाचार करने पर आप भी उनके साथ जाओगे तो आप भी हिणगुण वाले हो जाओगे ज्ञानी के पास सारे दुर्गुणों को देखकर ज्ञान गुण ले लेना ज्ञानी आपके सामने आ जाए तो उसके लिए खड़ा हो जाना इसके लिए रावण और लक्ष्मण का उदाहरण दिया।
3.धर्मी की पहचान-धर्म का नही धर्मी का ध्यान करो ,क्योकि धर्म तो अनन्त है ,सापेक्ष है।धर्म की चर्चा कम करते हैं धर्मी की चर्चा ज्यादा होती है मुझे गुरु चाहिए रत्नत्रय नहीं समयसार पढ़ना है गुरु से पढ़ो किसी को दूध चाहिए तो ग्वाले का पता बताया जाता है उसी प्रकार धर्म चाहिए तो धर्मी का पता बताया जाता है ।
4.स्व पर-आत्मा का स्वभाव है कोई न कोई परीणाम करते रहना वो परिणाम स्व चतुष्टय की तरफ आत्मा है तो आत्मा को उत्थान होता है पर चतुष्टय की तरफ जाता है स्व आत्मा का विनाश होता है और जब स्व आत्मा का विनाश होता है पर का विनाश कर देता है।
5.गुरु कौन-गुरु वह नही जो ज्ञानवान हैं गुरु वह है जो चारित्रवान है इसलिए चारित्रवान को गुरु बनाना,जो चारित्रवान हो यदि दीक्षा भी दी हो शिथलाचारी हो गुरु नहीं थोड़ा सा भी चारित्र हो वह नरक नहीं जा सकता हैं।
प्रवचन से शिक्षा-दुश्मन होते हुए भी यदि कोई हमसे विद्वान है तो उसके ज्ञान की इज्जत करना ।
सकंलन ब्र महावीर ब्र दिवस टेम्पल डे दिवस7339918672 परम गुरु भक्त 30मई2021
नमनकर्ता-कुलभूषण दिलीप उदगीरकर,प्रिया,वर्धमान,हर्षाली,दिलीप मोतीचंद,रत्नमाला,सुप्रिया तुशिकांत सांगोले,स्नेहल प्राची विनीत शिरूर अनंतपाळ,नेहा ईश्वरचंद कोंडेकर ईश्वरचंद मोतीलाल कोंडेकर,विशाल विश्वनाथ,शिल्पा विशाल आहेरकर लातूर महाराष्ट्र.
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