⏱ दैनिक पंचांग ✍️
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👉वीर निर्वाण सम्वत -2547 -48 , विक्रम सम्वत – 2078
07 मई , 2021 शुक्रवार , वैशाख कृष्ण पक्ष, एकादशी
👉 > संतान प्राप्ति में देरी , बार बार गर्भपात अथवा विहीनता क्यों ?
यों तो कुछ कारण हमारी गलतियों से भी बन जाते है, कुछ ज्योतिष और कुछ वास्तु से सम्बन्ध रखते है I
और यह सभी कारण हमारे पुर्वोपर्जित कर्मो के आधार पर बनते है, कोई कर्म बिना निमित्त के फल देने मे समर्थ नहीं है, अतः प्रतिकूल निमित्त से बच्चे का प्रयास करना चाहिए 🙏
ज्योतिष अनुसार संतान सुख कुंडली के पंचम भाव से देखा जाता है।
मोटे रूप में मुख्य कारण >
👉 अगर पंचम भाव में एक अधिक ऐसे ग्रह जो आपस में शत्रु हो
👉पंचम भाव पर अशुभ ग्रहो की दृष्टि हो तो गर्भपात होने की संभावनाए बनतीं है अथवा संतान से वंचित रहना पड़ सकता है।
वास्तु > वही नवदम्पत्ति को ईशान कोण में शयन करने से भी उक्त दोष लगता है।
👉पंचम भाव से सम्बंधित ग्रहो की दशाए नहीं आने पर भी संतान उत्पत्ति में देरी होती है।
जब तक दशा नहीं तब तक दिशा नहीं
अतः घबराये नहीं अच्छे ज्योतिषी एवं वास्तु के जानकारों से परामर्श ले।
फैक्ट्री , भूमि , भवन आदि की एनर्जी टेस्ट करवाकर सही मार्गदर्शन प्रात करे।
👉नक्षत्र -पूर्व भाद्रपद
👉चन्द्र – प्रात 5 :55 के बाद मीन
( आज जन्म लेने वाले बच्चो की प्रात 5 :55 के बाद मीन राशि होंगी
👉 अभिजित – 11:57 से 12:50
👉 राहुकाल -10:44 से 12:24
👉 दिशा शूल – पश्चिम
👉 अग्निवास- आकाश
सूर्योदय – 05:46
सूर्यास्त – 19:01
➡️दिन का चौघड़िया >
चर – सामान्य
05:44 से 07:24
लाभ – उन्नति
07:24 से 09:04
अमृत – सर्वोत्तम
09:04 से 10:44वार वेला
काल – हानि
10:44 से 12:24काल वेला Rahu Kalam
शुभ – उत्तम
12:24 से 14:03
रोग – अमंगल
14:03 से 15:43
उद्वेग – अशुभ
15:43 से 17:23
चर – सामान्य
17:23 से 19:03
🌙रात्रि का चौघड़िया >
रोग – अमंगल
19:03 से 20:23
काल – हानि
20:23 से 21:43
लाभ – उन्नति
21:43 से 23:03काल रात्रि
उद्वेग – अशुभ
23:03 से 24:23+
शुभ – उत्तम
24:23+ से 25:43+
अमृत – सर्वोत्तम
25:43+ से 27:03+
चर – सामान्य
27:03+ से 28:23+
रोग – अमंगल
28:23+ से 29:43+
वास्तु एवं ज्योतिष कंसलटेंट >> ( 20 वर्षो से निरंतर )
राकेश जैन हरकारा ,Mob- 9414365650
( परामर्श ऑफिस और फोन दोनों पर सशुल्क है )
