परलोक में भी भुगतना पड़ते हैं गलत कार्यों के परिणाम : उदार सागर

JAIN SANT NEWS

परलोक में भी भुगतना पड़ते हैं गलत कार्यों के परिणाम : उदार सागर विदिशा। जो भी गलत कार्य होते हैं उनका परिणाम को इस लोक और परलोक दोनों में भोगना पड़ते हैं। चोरी करना भी एक अपराध हैं। इसके परिणाम होने से अशुभ परिणामों को बांधता है जो कि दुर्गति के कारण बनते हैं। हालांकि आप लोग भी चोरी नहीं करते होंगे, लेकिन त्याग नहीं होने के

विदिशा। जो भी गलत कार्य होते हैं उनका परिणाम को इस लोक और परलोक दोनों में भोगना पड़ते हैं। चोरी करना भी एक अपराध हैं। इसके परिणाम होने से अशुभ परिणामों को बांधता है जो कि दुर्गति के कारण बनते हैं। हालांकि आप लोग भी चोरी नहीं करते होंगे, लेकिन त्याग नहीं होने के कारण उन पापों का दोष आपको लगता हैं। जो इस प्रकार के दुखों से बचना चाहते हैं, उनको संकल्प पूर्वक चोरी का त्याग करना ही चाहिए। उपरोक्त उदगार आचार्य उदारसागर जी महाराज ने जैन भवन किरीमोहल्ला में प्रातःकालीन प्रवचन सभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि स्थूल चोरी से तो आप लोग बच सकते हैं, लेकिन कुछ सूक्ष्मतम ऐसे आचरण हैं जिनसे एक गृहस्थ को बच पाना मुश्किल होता हैं, लेकिन जो कार्य आप लोग करते ही नहीं यानि कि किसी के यहां पर चोरी अथवा डाका डालते ही नहीं, किसी के धन का हरण भी नहीं करते तो उसका संकल्प पूर्वक त्याग कर उन पापों से बच जाते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ चोरी ऐसी होती हैं जैसे आपने कोई मकान खरीदा और यदि उसमें कोई गढ़ा हुआ धन मिलता हैं तो उस पर आपका अधिकार नहीं होता उस धन की स्वामी सरकार होती हैं। लेकिन ऐसे धन पर अक्सर नियत डांवाडोल हो जाया करती हैं। आचार्य श्री ने कहा कि प्रवचन सभा में सुनना और उस पर अमल करना दोनों में बहुत फर्क हैं। जब आपके सामने यदि कोई इस प्रकार का गढ़ा हुआ धन मिले तो क्या आप उसको छोड़ सकते हैं। आचार्य श्री ने कहा कि यहां प्रवचन सभा में तो सभी संकल्पित हो जाते हैं, लेकिन दूसरों के धन पर मन, वचन और शरीर से किसी भी प्रकार से आपका मन नहीं जाऐ ऐसा होना बहुत मुश्किल होता हैं।

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