जैन मुनि और राष्ट्र संत तरुण सागर महाराज का आज सुबह दिल्ली में निधन हो गया। वे 51 साल के थे। कई दिनों से उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी। तरुण सागर ने दिल्ली के कृष्णा नगर स्थित राधापुरी जैन मंदिर चातुर्मास स्थल पर अंतिम सांसे लीं। तरुण सागर को उनके कड़वे प्रवचनों के लिए जाना जाता था। वे अपने अनुयायियों को जो प्रवचन देते थे उन्हें कड़वे प्रवचन कहते थे। इन प्रवचनों में तरुण सागर समाज में मौजूद कई बुराइयों की तीखे शब्दों में आलोचना करते थे। उनके प्रवचनों की किताब भी ‘कड़वे प्रवचन’ नाम से प्रकाशित की जाती है।
कड़वे वचन
1. हंसते मनुष्य हैं कुत्ते नहीं
हंसने का गुण सिर्फ मनुष्यों को प्राप्त है इसलिए जब भी मौका मिले जी खोल कर मुस्कुराइए। कुत्ते चाहकर भी नहीं मुस्कुरा सकते हैं।
2. किसी को बदल नहीं सकते हैं
परिवार में आप किसी को बदल नहीं सकते हैं लेकिन आप अपने आप को बदल सकते हैं, आप पर ही आपका पूरा अधिकार है।
3. कन्या भ्रूण हत्या
जिनकी बेटी ना हो उन्हें चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए और जिस घर में बेटी ना हो वहां शादी ही नहीं करनी चाहिए। जिस घर में बेटी ना हो उस घर से साधु-संतों को भिक्षा भी नहीं लेनी चाहिए।
4. धर्म पति तो राजनीति पत्नी
राजनीति को धर्म से ही हम नियंत्रित करते हैं। अगर धर्म पति है तो राजनीति पत्नी। जिस तरह अपनी पत्नी को सुरक्षा देना हर पति का कर्तव्य होता है वैसे ही हर पत्नी का धर्म होता है कि वो पति के अनुशासन को स्वीकार करे। ठीक ऐसा ही राजनीति और धर्म के बीच होना चाहिए। क्योंकि बिना अंकुश के हर कोई बेलगाम हाथी की तरह होता है।
5. आपके नोट नहीं खोट चाहिए
मैं आपकी गलत धारणाओं पर बुलडोजर चलाऊंगा। आज का आदमी बच्चों को कम, गलत धारणाओं को ज्यादा पालता है। इसलिए वह खुश नहीं है। इसलिए मुझे आपके नोट नहीं, आपके खोट चाहिए।
6. दूसरे की प्रार्थना किसी काम की नहीं
तुम्हारी वजह से जीते जी किसी की आंखों में आंसू आए तो यह सबसे बड़ा पाप है। लोग मरने के बाद तुम्हारे लिए रोए, यह सबसे बड़ा पुण्य है। इसीलिए जिंदगी में ऐसे काम करो कि, मरने के बाद तुम्हारी आत्मा की शांति के लिए किसी और को प्रार्थना नहीं करनी पड़े। क्योंकि दूसरों के द्वारा की गई प्रार्थना किसी काम की नहीं है।
लाल किले से प्रवचन
2000 में जैन मुनि तरुण सागर ने लाल किले से प्रवचन दिया था
2000 में हरियाणा, 2001 में राजस्थान, 2002 में मध्य प्रदेश से भी प्रवचन दिया
2003 में गुजरात और 2004 में महाराष्ट्र में भी प्रवचन दिया
प्रगतिशील जैन मुनि का दर्जा
2006 में कर्नाटक के बेलगावी से 65 दिन की पैदल यात्रा करने के बाद तरुण सागर श्रवणबेलगोला में महा मस्तक अभिषेक समारोह में पहुंचे। हिंसा, भ्रष्टाचार और रूढ़िवाद की आलोचना के चलते उन्हें प्रगतिशील जैन मुनि का दर्जा मिला। इसके बाद उनके भाषणों को कड़वे प्रवचन कहा जाने लगा।
51 साल की उम्र में जैन मुनि तरुण सागर महाराज का दिल्ली में निधन
मध्य प्रदेश में जन्म
26 जून 1967 को मध्य प्रदेश के दमोह के एक गांव में जन्म हुआ
जैन मुनि तरुण सागर के बचपन का नाम पवन कुमार जैन था
8 मार्च 1981 को तरुण सागर ने वैराग्य के लिए घर छोड़ दिया था
20 जुलाई 1988 में तरुण सागर दिगंबर मुनि बनें
2002 में मध्य प्रदेश और 2003 में गुजरात ने उन्हें राज्य अतिथि का दर्जा दिया
2003 में तरुण सागर को इंदौर में राष्ट्र संत का दर्जा दिया गया
2012 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें तरुण क्रांति पुरस्कार से सम्मानित किया
तरुण सागर को उनके कड़वे प्रवचनों के लिए जाना जाता था। वे अपने अनुयायियों को जो प्रवचन देते थे उन्हें कड़वे प्रवचन कहते थे। इन प्रवचनों में तरुण सागर समाज में मौजूद कई बुराइयों की तीखे शब्दों में आलोचना करते थे। उनके प्रवचनों की किताब भी ‘कड़वे प्रवचन’ नाम से प्रकाशित की जाती है।
